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सन्देश

मानव अधिकार एक ऐसा विषय जिसके बारे में सम्पूर्ण विश्व की एक विचारधारा हैं |मानव अधिकारों की शिक्षा और हनन के मामलों को रोकने के लिए समय समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं| परन्तु फिर मानव अधिकारों की न तो शिक्षा में सुधार हुआ और न ही मानव अधिकारों के हनन के मामले कम हुए है|इनका एक कारण यह भी हो सकता हैं की जिन को इस की आवश्यकता हैं ये कार्यक्रम उन तक पहुँच ही नही पाते हो |क्योंकि आज भी वो ही तबका मानव अधिकारों से वंचित हैं जो आजादी के कुछ समय तक था|आज भी जनसँख्या के एक हिस्से को खाली पेट सोना पड़ता हैं |आज भी बन्दुआ मजदूरी करवाई जा रही हैं |बच्चों को बचपन में ही कुपोषण हो जाता हैं|जाती ,लिंग,धर्म,और आर्थिक आधार पर भी भेदभाव किया जाता हैं |हमारा सविधान इन सब की इजाजत नही देता उसके सामने सब को बराबर का दर्जा हैं |लेकिन फिर भी समाज में ये अपनी जड़ बनाये हुए हैं |मानव अधिकार सरंक्षण संघ का कार्य करने का क्षेत्र जमीनी स्तर हैं |ताकि सब को मानव अधिकारों की शिक्षा मिले और अगर उनके अधिकारों का किसी भी स्तर पर हनन हो तो वो उस के खिलाफ आवाज उठा सके |उनकी आवाज को उठाने में संघ उनकी साहयता करेगा |संघ एक ऐसे समाज की कल्पना करता हैं जिस में न केवल मानव अधिकारों की रक्षा हो बल्कि सब अपने कर्तव्य का भी पालन करें |

विकास
मानव अधिकार कार्यकर्त्ता


सन्देश

यदि हम को मानव अधिकारों का सम्मान करना हैं तो इनका व्यापक प्रसार करना आवश्यक हैं |शिक्षा मानव अधिकारों के प्रसार के बारे मे एक मजबूत भूमिका निभा सकती हैं|हालांकि हमारे देश मे आजादी के बाद से ही मानव अधिकारों को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट इनकी रक्षा के लिए काम करते आयें हैं |लेकिन फिर भी मानव अधिकारों के लिए हमारे देश में सन्तोषजंक काम नही हुआ हैं |आज भी किसी न किसी रूप में मानव अधिकारों का हनन हो रहा हैं |अगर आज के नागरिको को उनके मानव अधिकारों से सही परिचित नही किया गया तो न अपने अधिकारों की सुरक्षा कर पायेगे और न ही वो अपनी आने वाली पीढ़ी के अधिकारों की रक्षा कर सकेंगे |क्योंकि उनको इनके महत्व के बारे में जानकारी नही होती |ना वो अपना जीवन सही दिशा में मोड़ सकता और न वो देश को सही दिशा को दे सकता |यदि वे शिक्षित हैं तो वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी से भी जाग्रत हैं |उन को कोई किसी भी प्रकार के लालच देता हैं तो उनकी शिक्षा उनके सम्मान व आत्म निर्णय को मजबूत करती हैं |वे अपना सही पथ भी चुन सकते हैं और आने वाली पीडी को सही पथ से अगवत भी करा सकते हैं |इसी के साथ हमको अपनी युवा पीडी को अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों के बारे में भी बताना होगा |ताकि समाज के विकास में सभी को अपनी भागीदारी देने के अवसर सामान रूप से प्राप्त हो |

जयवीर गहलावत
अध्यक्ष एंवम संस्थापक
मानव अधिकार सरंक्षण संघ


सन्देश

पुरे संसार में महिलाओं के साथ भेदभाव तथा शोषण किया जाता रहा हैं |यह सभी देशो में अलग मापदंडो व तरीको से हो सकता हैं |हमारे देश में भी देवी के समान मानी जानी वाली नारी के सम्मान में गिरावट आई हैं |आर्थिक ,सामाजिक और राजनैतिक स्तर पर बिल्कुल निचले पायदान पर हैं |इस बात से भी इन्कार नही किया जा सकता की सार्वजनिक, सरकार ,राजनेतिक तथा अन्य रोजगारों में पिछले कुछ समय से भागीदारी बड़ी हैं |कुछ महिलाओं के सफ़ल होने पर भी हम अशिक्षित महिलाओंं को नजर अंदाज नही कर सकते |ग्रामीण क्षेत्र में हालत पहले की तरह ही बने हुए हैं |आज भी हमारे समाज में अशिक्षित महिलाओं की संख्या अधिक हैं|जिस कारण वो गरीबी ,कुपोषण ,तथा घरेलु हिंसा का शिकार हैं |ऐसे में गावों का देश कहलाने वाले इस देश में अगर संसाधनों पर महिलाओं का बराबर का अधिकार हो,कार्य करने की समान आजादी हो तो इनकी क्षमता पुरे देश की हालत को सुधार सकती हैं |महिलों में कानून का व्यवाहरिक ज्ञान बढ़ाने के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिय |

श्रीमती निर्मला देवी
महासचिव